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स्वास्थ्य

डायबिटीज के मरीज सबसे ज्यादा हो रहे है कोरोना वायरस के शिकार, ऐसे बरते सावधानी

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण उन लोगों में ज्यादा खतरनाक देखा गया है जिनको पहले से ही गंभीर बीमारियां हैं। इस वायरस का सबसे ज्यादा असर शुगर के मरीजों में देखने को मिल रहा है। एक्सपर्ट के अनुसार ऐसे मरीजों में कोरोना का खतरा 50 फीसद तक ज्यादा है, क्योंकि इनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ब्रिटेन में हुए एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना से जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें से 33 फीसद लोग डायबिटिक टाइप 2 के पेशेंट थे। फ्रांस में हुई रिसर्च में बताया गया है कि कोरोना संक्रमित 10 में से एक शुगर पेशेंट की हर 7 दिन में मौत हो रही है। ऐसे में शुगर पेशेंट को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।

दो तरह की डायबिटीज

डायबिटीज दो तरह की देखी जाती है। लेवल-1 टाइप डायबिटीज वो है जो बचपन से होती है, वहीं टाइप-2 का मोटापे की वजह से होना देखा गया है। इसका ज्यादातर शिकार 40 साल से ज्यादा उम्र वाले होते हैं। दोनों तरह की डायबिटीज का इलाज भी अलग-अलग होता है।

वायरस का खाना है शुगर

डायबिटीज एक तरह से मल्टी सिस्टम बीमारी है। यह शरीर के अंगों को कमजोर भी करती है। देखने में आया है कि शुगर की बीमारी कोरोना को आकर्षित करती है, क्योंकि शुगर से ही वायरस को खाना मिलता है और इसकी ताकत बढ़ती है।

इंसुलिन का असर कम

डायबिटीक पेशेंट में इंसुलिन लेने के बाद ही संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। इंसुलिन ब्लड में शुगर लेवल को कम करने का काम करती है, लेकिन बॉडी का शुगर कम नहीं करती है। ऐसे में इंसुलिन का असर वायरस पर बेअसर हो जाता है और संक्रमण का खतरा कम नहीं होता है।

अस्पताल में तुरंत हो भर्ती

डायबिटिक पेशेंट को अपना शुगर लेवल समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए। यह उनके लिए बहुत जरुरी है। अगर शुगर पेशेंट को कोरोना संक्रमण हो जाए तो उसे बिना देर किए तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। ऐसे मरीज अगर देर से अस्पताल मं भर्ती होंगे तो उनमें खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

किस तरह करें बचाव

– अपनी डाइट को कंट्रोल करें

– मीठी चीज़ों से दूरी बनाकर रखें

– मरीज अपनी नींद पूरी करे

– साफ-सफाई का ध्यान रखें

– बीमार व्यक्ति से हमेशा दूर रहे।

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